श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1
श्रीमद्भगवद्गीता
अथ प्रथमोऽध्यायः
धृतराष्ट्र उवाच
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ॥
अर्थ :- धृतराष्ट्र बोले—हे संजय ! धर्मभूमि कुरुक्षेत्रमें एकत्रित, युद्धकी इच्छावाले मेरे और पाण्डुके पुत्रोंने क्या किया ? ॥१॥
English meaning :- Dhritarashtra said, “When my troops and the sons of Pandu,
eager to fight, were arrayed on the Kuru field, the field of law,what did they do, Sanjaya?”
सञ्जय उवाच
दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा ।
आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत् ॥
अर्थ :- संजय बोले- उस समय राजा दुर्योधनने व्यूहरचनायुक्त पाण्डवोंकी सेनाको देखकर और द्रोणाचार्यके पास जाकर यह वचन कहा ॥ २ ॥
English meaning :- Sanjaya said, “When Duryodhana, the king, saw the army of
the Pandu sons assembled, he went to his teacher and spoke these words.
पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम् ।
व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ॥
अर्थ :- हे आचार्य ! आपके बुद्धिमान् शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्नद्वारा व्यूहाकार खड़ी की हुई पाण्डुपुत्रोंकी इस बड़ी भारी सेनाको देखिये ॥ ३ ॥
English meaning :- ‘Look at this huge army of the Pandu sons, teacher, arrayed for
battle by the son of Drupada, that brilliant student of yours.
अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि ।
युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः ॥
धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान् ।
पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः ॥
युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान् ।
सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः ॥
अर्थ :- इस सेनामें बड़े-बड़े धनुषोंवाले तथा युद्धमें भीम और अर्जुनके समान शूरवीर सात्यकि और विराट तथा महारथी राजा द्रुपद, धृष्टकेतु और चेकितान तथा बलवान् काशिराज, पुरुजित् कुन्तिभोज और मनुष्यों में श्रेष्ठ शैब्य, पराक्रमी युधामन्यु तथा बलवान् उत्तमौजा, सुभद्रापुत्र अभिमन्यु एवं द्रौपदीके पाँचों पुत्र - ये सभी महारथी हैं ॥ ४-६ ॥
English meaning :- Here are the heroes, the great archers, the equals of Bhima
and Arjuna in battle: Yuyudhana, Virata, and the great warrior Drupada; Dhrishtaketu, Chekitana, and the heroic king of Kashi; Purujit, Kuntibhoja, and Shaibya, bull among men; Yudhamanyu the bold and the heroic Uttamaujas; Saubhadra
and the sons of Drupada—all of them great warriors.
अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम ।
नायका मम सैन्यस्य सञ्ज्ञार्थं तान् ब्रवीमि ते ॥
अर्थ :- हे ब्राह्मणश्रेष्ठ ! अपने पक्षमें भी जो प्रधान हैं, उनको आप समझ लीजिये। आपकी जानकारीके लिये मेरी सेनाके जो-जो सेनापति हैं, उनको बतलाता हूँ ॥ ७ ॥
English meaning :- But, best of Brahmins, hear about our superior men, the
leaders of my army. I will mention them by name.
भवान् भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः ।
अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च ॥
अर्थ :- आप- द्रोणाचार्य और पितामह भीष्म तथा कर्ण
और संग्रामविजयी कृपाचार्य तथा वैसे ही अश्वत्थामा,
विकर्ण और सोमदत्तका पुत्र भूरिश्रवा ॥ ८ ॥
English meaning :- You yourself, Bhishma, Karna, and Kripa, victor in battle;
Ashvatthaman, Vikarna, as well as the son of Somadatta
अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः ।
नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः ॥
अर्थ :- और भी मेरे लिये जीवनकी आशा त्याग देनेवाले बहुत-से शूरवीर अनेक प्रकारके शस्त्रास्त्रोंसे सुसज्जित और सब-के-सब युद्धमें चतुर हैं ॥ ९ ॥
English meaning :- and many other heroes willing to sacrifice their lives for my sake,
all battle-hardened wielders of many kinds of weapons.
अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम् ।
पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम् ॥
अर्थ :- भीष्मपितामहद्वारा रक्षित हमारी वह सेना सब
प्रकारसे अजेय है और भीमद्वारा रक्षित इन लोगोंकी
यह सेना जीतनेमें सुगम है ॥ १० ॥
English meaning :- That force, protected by Bhima, is not a match for us, but this
force, protected by Bhishma, is a match for them.
अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः ।
भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि ॥
अर्थ :- इसलिये सब मोर्चोंपर अपनी-अपनी जगह स्थित रहते हुए आपलोग सभी निःसन्देह भीष्मपितामहकी ही सब ओरसे रक्षा करें ॥ ११ ॥
English meaning :- Indeed, it is Bhishma you must all protect along all avenues of
approach as you man your respective positions.
तस्य सञ्जनयन् हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः ।
सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान् ॥
अर्थ :- कौरवोंमें वृद्ध बड़े प्रतापी पितामह भीष्मने उस दुर्योधनके हृदयमें हर्ष उत्पन्न करते हुए उच्च स्वरसे सिंहकी दहाड़ के समान गरजकर शंख बजाया ॥ १२ ॥
English meaning :- In order to encourage him, grandfather, the majestic Kuru
elder roared his lion’s roar and blew his conch.
ततः शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः ।
सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत् ॥
अर्थ :- इसके पश्चात् शंख और नगारे तथा ढोल, मृदंग और नरसिंघे आदि बाजे एक साथ ही बज उठे। उनका वह शब्द बड़ा भयंकर हुआ ॥ १३ ॥
English meaning :- Then, all of a sudden, the conches, kettledrums, cymbals, big
drums, and horns were sounded: It was a tumultuous noise.
ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ ।
माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः ॥
अर्थ :- इसके अनन्तर सफेद घोड़ोंसे युक्त उत्तम रथमें बैठे
उहुए श्रीकृष्ण महाराज और अर्जुनने भी अलौकिक
शंख बजाये ॥ १४ ॥
English meaning :- And standing on their great chariot yoked with white horses,
Madhava and the son of Pandu blew their divine conches.
पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जयः ।
पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदरः ॥
अर्थ :- श्रीकृष्ण महाराजने पाञ्चजन्यनामक, अर्जुनने देवदत्तनामक और भयानक कर्मवाले भीमसेनने पौण्ड्रनामक महाशंख बजाया ॥ १५ ॥
English meaning :- Hrishikesha blew his Pancajanya, Dhananjaya his Devadatta,
and Wolf Belly of terrible deeds blew the great conch Paundra.
अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः ।
नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ ॥
अर्थ :- कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिरने अनन्तविजयनामक
और नकुल तथा सहदेवने सुघोष और मणिपुष्पकनामक
शंख बजाये ॥ १६ ॥
English meaning :- King Yudhishthira, the son of Kunti, blew his Anantavijaya;
Nakula and Sahadeva, their Sughosha and Manipushpaka.
काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः ।
धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः ॥
द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते ।
सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक् पृथक् ॥
अर्थ :- श्रेष्ठ धनुषवाले काशिराज और महारथी शिखण्डी एवं धृष्टद्युम्न तथा राजा विराट और अजेय सात्यकि, राजा द्रुपद एवं द्रौपदीके पाँचों पुत्र और बड़ी भुजावाले सुभद्रापुत्र अभिमन्यु - इन सभीने, हे राजन् ! सब ओरसे अलग-अलग शंख बजाये ।। १७-१८ ॥
English meaning :- The Kashi king, the great archer, and the great warrior,
Shikhandi; Dhrishtadyumna and Virata and the undefeated Satyaki; Drupada and the sons of Drupada: All together, O Lord of the Earth, as well as the mighty-armed Saubhadra, blew their conches—each and every one.
स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत् ।
नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलो व्यनुनादयन् ॥
अर्थ :- और उस भयानक शब्दने आकाश और पृथ्वीको
भी जाते हुए धार्तराष्ट्रोंके अर्थात् आपके पक्षवालोंके
हृदय विदीर्ण कर दिये ॥ १९ ॥
English meaning :- This thundering sound rent the hearts of the sons of
Dhritarashtra, resounding through earth and sky.
अर्जुन उवाच
अथ व्यवस्थितान्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान् कपिध्वजः ।
प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः ॥
हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते ।
सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ॥
अर्थ :- हे राजन् ! इसके बाद कपिध्वज अर्जुनने मोर्चा बाँधकर डटे हुए धृतराष्ट्र-सम्बन्धियोंको देखकर, उस शस्त्र चलनेकी तैयारीके समय धनुष उठाकर हृषीकेश श्रीकृष्ण महाराजसे यह वचन कहा- हे अच्युत ! मेरे रथको दोनों सेनाओंके बीचमें खड़ा कीजिये ॥ २०-२१ ॥
English meaning :- Then the ape-bannered son of Pandu, seeing the sons of
Dhritarashtra lined up, lifted his bow as the clash of arms began and spoke these words to Hrishikesha, O Lord of the Earth: ‘Achyuta, station my chariot between the two armies.
यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान् ।
कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन्रणसमुद्यमे ॥
अर्थ :- और जबतक कि मैं युद्धक्षेत्रमें डटे हुए युद्धके अभिलाषी इन विपक्षी योद्धाओंको भलीप्रकार देख लूँ कि इस युद्धरूप व्यापारमें मुझे किन-किनके साथ युद्ध करना योग्य है तबतक उसे खड़ा रखिये ॥ २२ ॥
English meaning :- so that I may observe these men, standing eager for battle,
with whom I must fight in this strenuous engagement.
योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य एतेऽत्र समागताः ।
धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धेर्युद्धे प्रियचिकीर्षवः ॥
अर्थ :- दुर्बुद्धि दुर्योधनका युद्धमें हित चाहनेवाले जो- जो ये राजा लोग इस सेनामें आये हैं, इन युद्ध करनेवालोंको मैं देखूँगा ॥ २३ ॥
English meaning :- I see these men who have assembled here, ready to fight,
wanting to please the evil-minded son of Dhritarashtra in battle.’
सञ्जय उवाच
एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत ।
सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम् ॥
भीष्मद्रोणप्रमुखतः सर्वेषां च महीक्षिताम् ।
उवाच पार्थ पश्यैतान्समवेतान्कुरूनिति ॥
अर्थ :- संजय बोले- हे धृतराष्ट्र ! अर्जुनद्वारा इस प्रकार कहे हुए महाराज श्रीकृष्णचन्द्रने दोनों सेनाओंके बीचमें भीष्म और द्रोणाचार्यके सामने तथा सम्पूर्ण राजाओंके सामने उत्तम रथको खड़ा करके इस प्रकार कहा कि हे पार्थ! युद्धके लिये जुटे हुए इन कौरवोंको देख ॥ २४-२५ ॥
English meaning :- When Gudakesha had spoken to him thus, O Bharata, Hrishikesha stationed their splendid chariot between the two armies, right in front of Bhishma, Drona, and all the kings and said, ‘Son of Pritha, behold these Kurus assembled.’
तत्रापश्यत्स्थितान् पार्थः पितॄनथ पितामहान् । आचार्यान्मातुलान्भ्रातॄन्पुत्रान्पौत्रान्सखींस्तथा ॥ श्वशुरान्सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपि ।
अर्थ :- इसके बाद पृथापुत्र अर्जुनने उन दोनों ही सेनाओंमें स्थित ताऊ- चाचोंको, दादों-परदादोंको, गुरुओंको, मामाओंको, भाइयोंको, पुत्रोंको, पौत्रोंको तथा मित्रोंको, ससुरोंको और सुहृदोंको भी देखा ॥ २६ और २७वेंका पूर्वार्ध ॥
English meaning :- After this, Arjuna, the son of Pritha, saw the uncles, grandfathers, great-grandfathers, gurus, maternal uncles, brothers, sons, grandsons and also friends, father-in-law and best-friends in both the armies.First half of 26th and 27th.
तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्बन्धूनवस्थितान् ॥
कृपया परयाविष्टो विषीदन्निदमब्रवीत्।
अर्थ :- उन उपस्थित सम्पूर्ण बन्धुओंको देखकर वे कुन्तीपुत्र अर्जुन अत्यन्त करुणासे युक्त होकर शोक करते हुए यह वचन बोले ॥ २७ वेंका उत्तरार्ध और २८ वेंका पूर्वार्ध ॥
English meaning :- Seeing all the brothers present there, Arjuna, the son of Kunti, filled with great compassion, uttered these words while mourning.Second half of 27th and first half of 28th.
अर्जुन उवाच
दृष्ट्वेमं स्वजनं कृष्ण युयुत्सुं समुपस्थितम् ॥
सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति ।
वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते ॥
अर्थ :- अर्जुन बोले - हे कृष्ण ! युद्धक्षेत्रमें डटे हुए युद्धके अभिलाषी इस स्वजनसमुदायको देखकर मेरे अंग शिथिल हुए जा रहे हैं और मुख सूखा जा रहा है तथा मेरे शरीरमें कम्प एवं रोमाञ्च हो रहा है । २८ वेंका उत्तरार्ध और २९ ॥
English meaning :- Arjun said - O Krishna! My limbs are getting relaxed and my mouth is getting dry and my body is trembling and thrilled after seeing this family, who are eager for war, standing in the battlefield. Late 28th and 29th
गाण्डीवं स्रंसते हस्तात्त्वक्चैव परिदह्यते ।
न च शक्नोम्यवस्थातुं भ्रमतीव च मे मनः ॥
अर्थ :- हाथसे गाण्डीव धनुष गिर रहा है और त्वचा भी बहुत जल रही है तथा मेरा मन भ्रमित-सा हो रहा है; इसलिये मैं खड़ा रहने को भी समर्थ नहीं हूँ ॥ ३० ॥
English meaning :- Gandiva slips from my hand, and as for my skin, it burns.
I cannot stand firm, and my mind seems to whirl.
निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव ।
न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे ॥
अर्थ :- हे केशव ! मैं लक्षणोंको भी विपरीत ही देख
रहा हूँ तथा युद्धमें स्वजनसमुदायको मारकर कल्याण
भी नहीं देखता ॥ ३१ ॥
English meaning :- I see inauspicious portents, Keshava, and I see nothing good
achieved by killing my family in battle.
न काङ्क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च ।
किं नो राज्येन गोविन्द किं भोगैर्जीवितेन वा ॥
अर्थ :- हे कृष्ण ! मैं न तो विजय चाहता हूँ और
न राज्य तथा सुखोंको ही । हे गोविन्द ! हमें ऐसे
राज्यसे क्या प्रयोजन है अथवा ऐसे भोगोंसे और
जीवनसे भी क्या लाभ है ? ॥ ३२ ॥
English meaning:- I don’t desire victory, Krishna, nor a kingdom or pleasures.
What use is a kingdom to me, Govinda? What is enjoyment or life?
येषामर्थे काङ्क्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च ।
त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च ॥
अर्थ :- हमें जिनके लिये राज्य, भोग और सुखादि अभीष्ट हैं, वे ही ये सब धन और जीवनकी आशाको त्यागकर युद्धमें खड़े हैं ॥ ३३ ॥
English meaning :- For precisely those for whose sake we desire a kingdom,
enjoyment, and pleasures are standing in line to battle against us, giving up their lives and riches.
आचार्याः पितरः पुत्रास्तथैव च पितामहाः ।
मातुलाः श्वशुराः पौत्राः श्यालाः सम्बन्धिनस्तथा ॥
अर्थ :- गुरुजन, ताऊ-चाचे, लड़के और उसी प्रकार दादे, मामे, ससुर, पौत्र, साले तथा और भी सम्बन्धी लोग हैं ॥ ३४ ॥
English meaning :- Teachers, fathers, sons, yes, even grandfathers, uncles,
fathers-in-law, grandsons, brothers-in-law, and other kinsmen.
एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन ।
अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते ॥
अर्थ :- हे मधुसूदन ! मुझे मारनेपर भी अथवा तीनों लोकोंके राज्यके लिये भी मैं इन सबको मारना नहीं चाहता; फिर पृथ्वीके लिये तो कहना ही क्या है ? ॥ ३५ ॥
English meaning :- these I don’t want to kill, even if they kill us,Madhusudana, even for the kingdom of the three worlds, and even less for the earth.
निहत्य धार्तराष्ट्रान्नः का प्रीतिः स्याज्जनार्दन । पापमेवाश्रयेदस्मान्हत्वैतानाततायिनः ॥
अर्थ :- हे जनार्दन ! धृतराष्ट्रके पुत्रोंको मारकर हमें क्या प्रसन्नता होगी ? इन आततायियोंको मारकर तो हमें पाप ही लगेगा ॥ ३६ ॥
English meaning :- What joy would we gain, Janardana, by killing the sons of
Dhritarashtra? Only evil would accrue to us by killing these malefactors.
तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान्स्वबान्धवान् ।
स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव ॥
अर्थ :- अतएव हे माधव! अपने ही बान्धव धृतराष्ट्रके पुत्रोंको मारनेके लिये हम योग्य नहीं हैं; क्योंकि अपने ही कुटुम्बको मारकर हम कैसे सुखी होंगे ? ॥ ३७ ॥
English meaning :- Therefore, we must not kill the sons of Dhritarashtra and our
kinsmen. How could we become happy by killing our family?
यद्यप्येते न पश्यन्ति लोभोपहतचेतसः ।
कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम् ॥
कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम् ।
कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्धिर्जनार्दन ॥
अर्थ :- यद्यपि लोभसे भ्रष्टचित्त हुए ये लोग कुलके नाशसे उत्पन्न दोषको और मित्रोंसे विरोध करनेमें पापको नहीं देखते, तो भी हे जनार्दन ! कुलके नाशसे उत्पन्न दोषको जाननेवाले हमलोगोंको इस पापसे हटने के लिये क्यों नहीं विचार करना चाहिये ? ॥ ३८-३९ ॥
English meaning :- Even if they, their minds seduced by greed, do not see the
wickedness of destroying the family and the crime in betraying their friends, how could we fail to know that we should turn away from this evil, we who see the wickedness
of destroying the family, Janardana?
कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः ।
धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत ॥
अर्थ :- कुलके नाशसे सनातन कुल-धर्म नष्ट हो जाते
हैं, धर्मके नाश हो जानेपर सम्पूर्ण कुलमें पाप भी
बहुत फैल जाता है ॥ ४० ॥
English meaning :- When the family is destroyed, the eternal family laws are
lost, and when the law is lost, lawlessness overwhelms the whole family.
अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः ।
स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसङ्करः ॥
सङ्करो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च ।
पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः ॥
अर्थ :- हे कृष्ण ! पापके अधिक बढ़ जानेसे कुलकी स्त्रियाँ अत्यन्त दूषित हो जाती हैं और हे वार्ष्णेय ! स्त्रियोंके दूषित हो जानेपर वर्णसंकर उत्पन्न होता है। वर्णसंकर कुलघातियोंको और कुलको नरकमें ले जानेके लिये ही होता है। लुप्त हुई पिण्ड और जलकी क्रियावाले अर्थात् श्राद्ध और तर्पणसे वञ्चित इनके पितरलोग भी अधोगतिको प्राप्त होते हैं ।।४१- ४२।।
English meaning :- Because lawlessness prevails, Krishna, the women of the
family become corrupted. When the women are corrupted,Son of Vrishni, the classes get confused, a confusion leading
to hell for family and family killers. For their fathers fall,deprived of their offerings of rice balls and water.
दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसङ्करकारकैः ।
उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः ॥
अर्थ :- इन वर्णसंकरकारक दोषोंसे कुलघातियोंके सनातन
कुल- धर्म और जाति-धर्म नष्ट हो जाते हैं ॥ ४३ ॥
English meaning :- Because of these transgressions of the family killers which
cause confusion of the classes, the eternal caste laws and family laws are set aside.
उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन ।
नरकेऽनियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम ॥
अर्थ :- हे जनार्दन ! जिनका कुल-धर्म नष्ट हो गया है, ऐसे मनुष्योंका अनिश्चित कालतक नरकमें वास होता है, ऐसा हम सुनते आये हैं ॥ ४४ ॥
English meaning :- We have heard, Janardana, that a place in hell is guaranteed
for men who have set aside their family laws.
अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम् ।
यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः ॥
अर्थ :- हा ! शोक! हमलोग बुद्धिमान् होकर भी महान् पाप करनेको तैयार हो गये हैं, जो राज्य और सुखके लोभसे स्वजनोंको मारनेके लिये उद्यत हो गये हैं ॥ ४५ ॥
English meaning :- Alas! We have decided to do great evil, because we are ready to kill our family out of greed for the pleasures of a kingdom.
यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणयः ।
धार्तराष्ट्रा रणे हन्युस्तन्मे क्षेमतरं भवेत् ॥
अर्थ :- यदि मुझ शस्त्ररहित एवं सामना न करनेवालेको शस्त्र हाथमें लिये हुए धृतराष्ट्रके पुत्र रणमें मार डालें तो वह मारना भी मेरे लिये अधिक कल्याणकारक होगा ॥ ४६ ॥
English meaning :- If the sons of Dhritarashtra, weapons in hand, were to kill me in battle, unresisting and unarmed, that would be better for me.’
सञ्जय उवाच
एवमुक्त्वार्जुनः सङ्ख्ये रथोपस्थ उपाविशत् ।
विसृज्य सशरं चापं शोकसंविग्नमानसः ॥
अर्थ :- संजय बोले- रणभूमिमें शोकसे उद्विग्न मनवाले अर्जुन इस प्रकार कहकर, बाणसहित धनुषको त्यागकर रथके पिछले भागमें बैठ गये ॥ ४७ ॥
English meaning :- With these words, Arjuna let go of his bow and arrows in
the midst of battle and sank down in his chariot, his mind tormented by sorrow.”
ॐ तत्सदिति श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादेऽर्जुनविषादयोगो नाम प्रथमोऽध्यायः ॥ १ ॥
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